Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2017

A few questions to Halloween party people of India

Ugly pumpkins, ridiculous costumes and over-the-top makeup, trick or treating for kids and scary themed parties for the adults, the story of Halloween runs deeply in the Western culture. And these days I have been observing a flood of Halloween posts in my social media accounts . "10 ideas to celebrate Halloween with your kids..", "10 craft projects for Halloween..", "10 things to do at Halloween night.." There are parties happening for Halloween. Costumes are getting sold. Myriads of contests are posting spooky pictures and asking to share even more ghostly pictures. And amidst all this, I am puzzled, baffled and tickled.

I don't know if this is the notion of globalization or a modest thought to adopt cultures regardless of the geographical borders. Howbeit, I am sure about one thing that I hate the idea of kids celebrating Halloween here in India.

I have a few questions in my mind that I humbly want to ask those Halloween party people:
How you are p…

मम्मा, मैं आपसे शादी करुँगा..

कल शाम मैं अपने ३ साल के बेटे विभू के साथ खेल रही थी. दिवाली के बाद जले हुए दिए इकट्ठा करके वो अक्सर ही खेलता है तो कल मैं भी शामिल हो गई उसके खेल में. मैंने दियो से एक के ऊपर एक रख कर ऊंचा सा एक आकर बनाया और और अपने बेटे से कहा "देखो..मैंने टेम्पल (मंदिर) बना दिया.." मेरा बेटा खुश हुआ उसे देख कर फिर कुछ सोच कर उसने सबसे सामने वाला दिया अपने जगह से हटा दिया और अपने पीछे रख लिया. मैं समझने की कोशिश ही कर रही थी कि ऐसा क्यों किआ उसने, उसने उत्सुकता से बोला "मम्मा.. अब मैं टेम्पल के अंदर आ गया.. अब पंडित जी मेरी शादी करवा देंगे.." मैं तो सन्न हो गई एकदम. ३ साल का बालक और शादी की बातें. फिर मैंने उससे पूछा " पंडित जी शादी करवाते है क्या?" मेरे बेटे ने सर हिलाते हुए जवाब दिया "हाँ .. पंडित जी शादी करवाते है और फिर वापस अपने घर चले जाते है.." मुझे हसीं आ गई उसकी बात पर.
फिर मैंने सोचा इससे पता करती हूँ कि शादी के बारे में इसे किसने बताया. क्यूकि आज तक मैंने उससे शादी के बारे में कोई बात नहीं की. और मेरा बेटा सीधे पंडित जी तक पहुंच गया तो मैं अधीर हो …

#CelebratingSuper झोला लेकर आया करो बाबू जी..

दिल्ली को दिलवालो की दिल्ली कहा जाता है. दिलवाले मतलब मस्तमौला लोग जो दुनियादारी से दूर है और दिल से मज़बूर है. पर पिछले ६ सालो से दिल्ली में रहने के बाद मुझे थोड़ी शिकायत सी है इस कहावत से. ये बात दिल्ली में रहने वाले सारे लोगो के लिए नहीं है पर काफी सारे दिल्ली के दिलवाले दिल्ली को अच्छा और सुन्दर रखने के बारे में ज़रा भी नहीं सोचते. गंदगी, प्रदूषण और शोर की कोई कमी नहीं है अब अपनी दिल्ली में. पर शुक्र है कुछ लोग अब भी दिल्ली को अच्छा, सुन्दर और स्मार्ट बनाने में लगे है. अब वोडाफोन को ही देख लीजिये. कितने ही नए कदम उठाए है दिल्ली को बेहतर बनाने के लिए. १२० के करीब मुफ्त wifi  ज़ोन्स दिए है वोडाफ़ोन ने  दिल्ली-NCR में जहाँ लोग मुफ्त इंटरनेट का मज़ा ले सकते है, चाहे वो वोडाफोन उपभोक्ता है या नहीं. वोडाफोन के बारे में और जानने के लिए ये लिंक देखे https://www.vodafone.in/home-delhi

पर क्या आपको पता है की वोडाफ़ोन ने दिल्ली-NCR में पहला एयर पूरिफाइंग बस स्टैंड बनवाया है जिससे कि बस का इंतज़ार कर रहे लोग शुद्ध हवा में साँस ले?  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से काफी जगहों पर हवा की स्तिथि काफी ख़राब है.और…

It is because #SHE TOO

The recent #MeToo initiative turned into a campaign and a movement against sexual assault against women worldwide. The idea was started as an online impeachment against the Hollywood producer, Harvey Weinstein, which women across the world have joined by sharing own stories and experiences of sexual assaults. There are ordinary women to film stars, sports figures to musicians and well-known personalities to adequately unknown sharing with each other the harsh they had been to.

Now that I know it is not just me but “she too”, “she too” and “she too”, I have a mixed feeling of pleasure and pain. So many issues of sexual assaults against women are brought to light giving us the real shades of the picture of women in a country that boasts of its being culturally nurtured.
We live a society that makes the accused feel ashamed of what she had to suffer on herself because of the sick mentality of someone else. She is made embarrassed of her own character despite the fact that she resisted w…

The Eco of Appaji’s Thumari..

“Babul mora naihar chuto jaye..”, “Runak Jhunak Mori Baje payaliya..”, “Hamse najariya Kahe pheri ho balam..” and many more such are going to remain as the heritage of Indian classical music as the queen of thumari Appaji passed away. 
To all music lovers, this is a moment of sob and sighs. However, those who have ever heard Appaji live in a performance or have ever heard her Raag and Taans with a devoted heart would certainly feel the echo of her voice in their ears just after they get this news. Appaji was a music icon who not only broke the barriers of orthodox society that wanted to her voice caged inside the four walls of a house but also liberated thumari (a form of classical Indian music) from courts and kothas taking the same to internally applaud-able status.

Appaji was called by this name out of love and reverence by her disciples while her name on the hall of fame is written as Girija Devi. Girija is the name of the wife of Lord Shiva and the power herself. So was Girija Devi…

अटूट आस्था और विश्वास का होता है "छठ पर्व"

मैंजबस्कूलमेंथीतबएकअच्छीदोस्तरूपलकेघरमनायाजाताथाछठपर्व. हमसारे दोस्त दिवाली केलिएनएकपडेलेतेथेऔररूपलबतातीथीकीछठकेलिएलायीहैनएकपडे. हमारेघरदिवालीलाइटऔरजगमगभाईदूजतकरहतीथीपररूपलकेघरलाइटछठपर्वतकलगीरहतीथी. एकतरहसेजितनाउत्साहितहमदिवालीकोलेकररहतेथेरूपलउतनाहीउत्साहितछठकेलिएरहतीथी. मेरीखासदोस्तथीतोमेरामेंछठपर्वकोलेकरउत्साह