Skip to main content

#MondayMommyMoments क्यूकि तुम बड़ी जल्दी सीख रहे हो सब..

छोटे बच्चे कितने जल्दी चीजे सीख लेते है ये मैंने अपने बेटे को देख कर समझा. टीवी का रिमोट कैसे काम करता है.. खिलौनों के सेल कैसे निकल सकते है.. स्टूल को इस्तेमाल कैसे करे कि स्विच मिल जाए खेलने के लिए.. ये सब मेरे ३ साल के बेटे ने ना जाने कैसे सीख लिया!! मैं अपने फ़ोन में पासवर्ड डाल कर रखती हूँ ताकि जब तक मैं ना चाहू वो फ़ोन में गेम्स ना खेल पाए. पर उसने पता नहीं कैसे पासवर्ड भी डालना सीख लिया 😃.

अभी कुछ दिनों पहले मैं अपने बेटे को सुलाने के लिए माहौल बना रही थी. माहौल से मेरा मतलब है उसे बताना कि अब सोने का टाइम है और उसे अब अपने दिमाग को आराम देना चाहिए. तो मैं नाईट लैंप जला देती हूँ और कमरा बंद करके माहौल बनाती हूँ सोने का. इसी दौरान मैं उसे नाईट सूट भी पहनाती हूँ जिसका भी मतलब है अब गुड नाईट करने का वक्त आ गया. मैंने अभी नाईट सूट निकाला ही था और मैं अलमारी बंद करके पलटी तो देखा मेरे बेटे ने नाईट सूट पहन भी लिया था. मैं एकदम भौचक्की रह गई. खुश भी थी कि खुद से सीख गया एक और चीज पर उससे ज्यादा हक्की- बक्की थी कि कितनी जल्दी सीख रहा है सबकुछ ये..

मेरी दोस्त कहती है कि वो एक होशियार बच्चा है इसलिए जल्दी सीख लेता है सब कुछ. तो क्यों ना जीवन की कुछ बाते उसे जल्दी सीखा दू..? मुझे पता है काफी कुछ वो स्कूल जाकर सीख लेगा और कुछ चीजे उसे दोस्तों, समाज और आस पास के लोगो से मिल जाएंगी. फिर भी मैंने कुछ बाते सोची है जो मैं उसे सीखना शुरू कर रही हूँ अभी से..

१. कोई काम लड़का -लड़की का अलग या विशेष नहीं होता. सभी काम सब लोग कर सकते है और करने भी चाहिए. तो मैं चाहती हूँ कि वो मेरे साथ किचन के काम सीखे. वो मेरे साथ कपड़ें धोना सीखे. उसे आत्म निर्भर बनने के लिए अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम भी सीखने होंगे. मैं चाहती हूँ कि वो अच्छा जीवन साथी बनने के लिए अभी से चीजे सीखे.

२. घर के बाहर का हर बुजुर्ग उसके लिए वैसे ही आदरणीय होना चाहिए जैसे उसके अपने दादा-दादी या नाना-नानी है. उसे समझना होगा कि छोटे बच्चो और बुजुर्गो को ज्यादा प्यार की जरुरत होती है. और अगर हम सभी बाहर के बुजुर्गो को भी प्यार और आदर देना शुरू कर दे तो शायद उन्हें घर में मिलने वाली प्यार की कमी से उबरने में मदद मिल सके.

३. मैं चाहती हूँ कि वो दूसरो की बड़ाई करना सीखे. मुझे कभी-कभी लगता है कि ये गुन मेरे पतिदेव में नहीं है. वो मेरे बनाए हुए खाने की कम ही तारीफ करते है. हां, जब मैं खुद से पूछती हूँ कि कैसा बना है तो बोल देते है अच्छा है. पर प्रशंशा करना अपने आप में एक बहुत बड़ा साधन है दूसरे को ये बताने कि उसकी मेहनत सफल रही. थोड़ी से बड़ाई अपनों को और पास ला सकती है तो मैं चाहती हूँ मेरे बेटा बाकी सब साइंस के साथ ये कला भी सीखे.

४. मैं उसे अभी से सीखना चाहूंगी कि हार और जीत खेल के दो पहलू है. ये खेल मैदान के भी हो सकते है या फिर रिश्तो के भी. और किसी भी तरह की हार का ये मतलब नहीं कि वो हताश हो जाए, फिर कोशिश न करे..या फिर किसी के लिए गलत भावना रखे. अपना बेस्ट देना ही हमारा काम होना चाहिए. अगर उसके बाद भी हार मिले तो दो गुने उत्साह से अगली बार कोशिश करनी चाहिए. और हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते है.. ऐसा मैंने SRK से सुना था :)

बचपन चिकनी मिट्टी के समान होता है. उसे जैसा चाहे वैसे ढाल सकते है. तो अभी से इस बात को ध्यान में रखना एक माँ होने के नाते मेरे लिए भी जरूरी है..सीखने के लिए अभी बहुत कुछ सामने आने वाला है मेरे बेटे के लिए. वो अभी सिर्फ ३ साल का है. पर कुछ चीजे बच्चे सिर्फ घर पर ही सीख सकते है तो मेरी कोशिश ये हमेशा रहेगी कि वो जीवन जीने की कला जरूर सीखे. 

Comments

  1. Aapki khwhaishein, sanskarik hain. Kabhi kabhi mai darti hu ki kya ham aaj bhi aisi duniya me rehte hain jahan ham doosro ka aadar aur lihaaz karna seekhte hai? Aapka blog padhkr bohot khushi hui, kyuki us se mere sawal ka jawab haan milta hai!

    ReplyDelete
  2. thank you Prisha.. koshish to karni hi chahiye bachcho ko sikhane ki, fir aage wo apna future khud hi banate hai..

    ReplyDelete
  3. Beautiful post and what a smart child you have. Have a nice day.

    ReplyDelete
  4. Yahi koshish, vichaar, Sanskar Vibhu ko Safal banayenge :)
    Great read..

    ReplyDelete
  5. These are some great points you mentioned here Shipra. Hindi id my favorite language. I enjoyed reading this one. :)

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

पत्नियों के लिए भी एक व्रत का प्रस्ताव..

अरे याद है ना.. हर साल की तरह वो प्यार का त्यौहार फिर से आ गया.. अच्छा तो आप कंफ्यूज हो गई कि ये वैलेंटाइन डे तो कब का जा चुका अब किस प्यार के त्यौहार कि बात करने लगी मैं.. बताती हूँ बताती हूँ.. अपनी हिन्दू सभ्यता में भी एक प्यार का त्यौहार होता है "करवा चौथ.."अहा, क्या उत्सव है प्रेम का. पहले प्रेम मिश्रित सेवा फिर सेवा के बदले प्रेम मिश्रित उपहार. वाह..

बाजार पट गए है डिज़ाइनर चमकदार छलनी से लेकर गोटे लगी थालियों से और होने भी चाहिए. आखिर इस कदर महान संस्कृति जिसमें पति को देवता मान कर, उनके लिए दिन भर भूखे प्यासे रहकर पत्नियां व्रत करती हैं, उनकी उम्र बढ़ाने जैसा ईश्वरीय कार्य करती हैं, उस दैवीय व्रत का इतना उत्सव तो होना ही चाहिए. और याद रहे चरणस्पर्श करना एकदम जरूरी है व्रत के नियमो के हिसाब से नहीं तो पति की उम्र से छेड़ छाड़ हो सकती है. समझ नहीं आता इतना ज्ञान आया कहा से हमारे पूर्वजो में जिससे ये पता चला कि अगर पत्नी दिन भर भूखे प्यासे रहकर चाँद की पूजा करे तो पति की उम्र साल दर साल बढ़ती जाती है? वैसे धन्य है भारतीय महिलाये. पति चाहे शराबी, जुवारी कबाबी कैसा भी हो, पतियों…

Be Healthy With Infused Water And InstaCuppa #SuperBloggerChallenge2018 #Instacuppa

Two things are in my mind mostly these days: Having a healthy Lifestyle and Staying Happy.
Happiness and good health are very much connected to each other, isn't it? If you are happy your health remains good. And if you are healthy, you keep on increasing your happiness. The easiest trick to stay healthy is to have a good water intake every day. However, as simple as it looks, for most of the people, drinking sufficient water every day is a task. They somehow ignore this very essential need of the human body. Every single cell in our body needs water to function properly. The result of less water intake is eventual dehydration, dull face, fatigue, bloating and weak immune system.

Can drinking water help you stay healthy? Spoiler alert, YES IT CAN!

Now, if you are bored of having the plane, tasteless water, then you must know about INFUSED WATER. Infused water is adding different kinds of fruit, vegetables, and herbs to water and letting it settle for some time. This way, all antiox…

The Young Chronicle - A Personal News App For Kids

Our kids these days are spending a good amount of time checking and using today's smartphone. And the most amusing thing is kids are getting, even more, smarter to understand this whole world of apps, games, selfies and video recording. In no time they understand how such and such app works. In very less time, they skill those gimmicky games and challenge us showing the score. However, this screen time should be controlled for good health of a child. For parents, it is a responsibility to keep an eye on what content kids are watching, what types of games they are playing and what things they are sharing on social media.

 Being a new generation people, we can't live separated from our phones. Neither can we keep our kids completely away from using phones. But what we can do is to facilitate things that can be helpful for kids even if they come in the form of phone apps and games. Educational apps and informative games can provide our kids much-needed insight and knowledge. One…