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पति नही जीवनसाथी बने..

एक दिन मैं अपने पतिदेव से कह रही थी कि आज कल ये टीवी के डेली soaps ने पत्नियों को दो तरीको से टाइपकास्ट कर दिया है. पहली मिसाल उन पत्नियों क़ी है जो पूरी तरीके से मासूम और सीधी हैं. वो किसी को जवाब नही दे सकती और ना ही किसी किसी की तीखी बातें सुन सकती हैं. हर बात पर या तो खुद को या फिर किस्मत को जिम्मेदार बना देती हैं. ऐसी पत्नियों के लिए पति अभी भी परमेश्वर है. वो मारे पीटे कुछ भी करे वो उफ़ भी नही करेंगी. जरुरत पड़े तो उसकी दूसरी या तीसरी शादी भी खुद ही करवा देंगी. यू कहे तो पूरी गाय है गाय. वही दूसरी मिसाल ऐसी पत्नियों क़ी है जो पूरी तरह से बही हुई है. उनके अजब गजब शौक है. वो घर में किसी क़ी इज्जत नही करती. और अगर पति क़ी करे भी तो पीठ पीछे कोई ना कोई शाजिश रचती रहती है. वो जेम्स बांड क़ी तरह गुंडे बदमाशो से भी लड़ लेती है और जरुरत पड़े तो उनसे काम भी करवा लेती है. पर इन दोनों टाइप्स के बीच की पत्नियों को किसी सीरियल में क्यों नही दिखाते? जो ना ज्यादा सीधी है और ना ज्यादा तेज. जिसे अपने परिवार क़ी ख़ुशी से मतलब है पर जिसे खुद को भी खुश करना पसंद है.

मुझे ऐसा लगता है कि समय के साथ अच्छी पत्नियों को और अच्छा दिखाने के लिए ये पहले टाइप क़ी पत्नियों को जन्म दिया गया है जो पति के लिए कुछ भी कर सकती है. और इसी के चलते २१वी शदी के पतियो को अभी भी १८वी शदी क़ी पत्नी चाहिए. पर ये अच्छी पत्नी होती कैसी है? उसके चार हाथ होते है क्या या फिर दो दिमाग? उसके पास आंसुओ का सैलाब नही होता क्या जो हर लड़की के पास होता ही है? या फिर वो पूरी तरह से दिल दिमाग से बस हँसने और मुस्कुराते रहने के लिए बचपन से कोई अलग ट्रेनिंग लेती है? हम में ज्यादातर लोग ऐसे ही समाज में बड़े हुए है जहा अच्छी पत्नी वो है तो अपना सब कुछ परिवार के लिए दे दे. अच्छी पत्नी वो है वो पति के तानो को भी हस्ते हुए सहे. वो कभी किसी चीज पर अधिकार ना जताए और ना ही मांग रखे. और सबसे बड़ी बात वो बहस ना करे. अच्छी पत्नी तब और अच्छी हो जाती है जब वो अपनी खुशियो को मन के कोने में कही दबा देती है.

ज़माने के साथ सब कुछ बदल गया है पर पत्नियों के लिए ज्यादा अंतर नही आया है. आज कल के मॉडर्न लड़को को कामकाजी पत्नी तो चाहिए पर घर के कामो में हाथ बटाने से परहेज है उनको. पत्नी का appraisal अच्छा होना चाहिए पर अगर वो अपनी मर्जी से पैसे खर्च करना चाहे तो हिसाब चाहिए उनको. बच्चे उनको भी पसंद है पर उनकी देखरेख करने में भी पतियो को परेशानी है. ज्यादातर घरो में अभी भी ये मॉडर्न लड़के परमेश्वर बनने की आस रखते है. वो पत्नी को समझना जरुरी नही मानते. हाँ पत्नी को जरूर पता होना चाहिए की पति को कब चाय चाहिए होगी और कब खाना. पत्नी को ध्यान रखना चाहिए कि कौन सी बात पति को ख़राब लग जाती है तो वो ना बोले. उसे पति के घरवालो के बारे में भी कोई बात नही बोलनी चाहिए पर पति को अधिकार है कि वो पत्नी के घरवालो को कुछ भी कह दे. अभी भी पति पत्नी के बीच के तनाव का कारन ज्यादातर पत्नियों को ही माना जाता है. और अभी भी यही उम्मीद की जाती है "पत्नियों को ही झुकना चाहिए".

पति पत्नी का रिश्ता दुनिया का सबसे अजीब रिश्ता है. हर शादीशुदा जोड़े के अपने नियम कानून होते है जो ज्यादातर पतियो ने ही बनाए होते है. वैसे तो अगर हिन्दू मान्यताओ की बात करे तो शादी के समय हमें सात वचन सुनाए जाते है जो की असल में टर्म्स एंड कंडीशन होते है जिन्हें मानने पर ही पत्नी पति के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने के लिए हामी भर्ती है. पर वो याद किसे रहते है. फिर तो वही रोज कि खींच तान, खाना पकाना, रूठना मनना  और यू ही दिन काटते रहते है. सबसे जरुरी चीज जो मुझे लगती है इस रिश्ते के लिए वो है एक दूसरे को समझना और सम्मान देना. तो जब अब सती सावित्रियो का समय नही रहा तो पतियो को भी बदलना चाहिए. खुद सम्मान लेते हुए देना भी शुरू करना चाहिए. उनको भी इस बात का ध्यान देना चाहिए कि पत्नी को क्या पसंद है और क्या नही. अगर अच्छी पत्नी चाहिए तो अच्छे पति भी बनना होगा (जिसकी बात लोग काम ही करते है). पति बनने से ज्यादा जीवन साथी बनने पर जोर देना चाहिए. एक ऐसा मित्र जो पत्नी के मन के कोनो में दबी हुई छोटी से छोटी मंशा भी भाप ले!





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